Savarna Deergha Sandhi

सवर्ण दीर्घ सन्धि किसे कहते है? – Savarna Deergha Sandhi

Savarna Deergha Sandhi: हेलो दोस्तों, इस आर्टिकल में हम आपको सवर्ण दीर्घ सन्धि किसे कहते है के बारे में विस्तार से बताएंगे | स्कूल और प्रतियोगी परीक्षाओ में इससे बाहर कोई भी प्रश्न नहीं पुछा जायेगा तो इस आर्टिकल को अच्छे से पढ़े |

Savarna Deergha Sandhi

महर्षि पाणिनि के द्वारा लिखित अष्टाध्यायी इस ग्रन्थ में इस सन्धि को इस सूत्र के द्वारा बताया गया है –

यदि सन्धिकार्य करते समय पूर्ववर्ण और उत्तरवर्ण, दोनों भी सवर्ण हो, तो दोनों की जगह पर उन दोनों के स्थान पर एक दीर्घ आदेश होता है, जो उन दोनों का सवर्ण हो।”

हमे पता है कि उपर्युक्त किताबी व्याख्या बहुतांश नवीन छात्रों को समझने के लिए मुश्किल हो सकतीSavarna Deergha Sandhi है। आप चिन्ता ना करें हम आप को क्रमशः विस्तार से समझाते हैं। पहले सवर्ण दीर्घ संधि को अच्छे से समझ लेते हैं।

सवर्ण दीर्घ सन्धि के सूत्र और उदाहरण –

यदि सन्धिकार्य में पूर्ववर्ण अ अथवा आ हो और उत्तरवर्ण भी अ अथवा आ हो, तो दोनों के स्थान पर आ यह आदेश प्राप्त हो जाता है।

  • अ/आ = अ/आ –   आ
  •  इ/ई   =  इ/ई –    ई
  • उ/ऊ =  उ/ऊ  –   ऊ
  • ऋ/ॠ = ऋ/ॠ   – ॠ
  •  ॠ लृ    =  लृ    –  लृ  

 (लृ का दीर्घ रूप नहीं होता है)

अ/आ + अ/आ = आ के उदाहरण

  • दैत्य + अरि:        =  दैत्यारि:
  • विद्या + आलय:   =  विद्यालय:
  • तुल्य + आस्यम्    = तुल्यास्यम्
  •  मम  + अपि         = ममापि
  •  महा  + आत्मा      = महात्मा
  •  वेद  + अभ्यास:    = वेदाभ्यास:
  •  कमल + आकर:   = कमलाकर:
  •  श्रद्धा  + अस्ति      = श्रद्धास्ति
  •  विद्या + अर्थी         = विद्यार्थी
  •  परम + अर्थ:         = परमार्थ:
  •  दण्ड + अस्ति        = दण्डास्ति

इ/ई   +  इ/ई   =  ई  के उदाहरण

यदि सन्धिकार्य में पूर्ववर्ण इ अथवा ई हो और उत्तरवर्ण भी इ अथवा ई हो, तो दोनों के स्थान पर ई यह आदेश प्राप्त हो जाता है।

  •       भूमि + ईश:  = भूमीश:
  •        कवि + इन्द्र: =  कवीन्द्र:
  •        हरि + ईश: = हरीश:
  •        श्री + ईश:  = श्रीश:
  •        यदि + इच्छा = यदीच्छा
  •        सती + ईश: = सतीश:
  •        मुनि + इन्द्र: = मुनीन्द्र:
  •        नदी +इदानीम् = नदीदानीम्
  •        महती + इच्छा = महतीच्छा
  •        दधि +इन्द्र: = दधीन्द्र:
  •        देवी + ईक्षते = देवीक्षते
  •         पिबामि + इति = पिबामीति
  •         गौरी + इदम् = गौरीदम्

उ /ऊ   +  उ /ऊ    =  ऊ  के उदाहरण

यदि सन्धिकार्य में पूर्ववर्ण उ अथवा ऊ हो और उत्तरवर्ण भी उ अथवा ऊ हो, तो दोनों के स्थान पर ऊ यह आदेश प्राप्त हो जाता है।

  •       विष्णु + उदय: = विष्दणूय:
  •       भानु + उदय: =   भानूदय:
  •       वधू + उत्सव: =  वधूत्सव:
  •       तरु + उपेत  =    तरूपेत
  •       सु + उक्ति:  =     सूक्ति:
  •       विधु +उदय: =   विधूदय:
  •       यवागू + ऊष्मा  =  यवागूष्मा
  •       तनु +  ऊष्मा  =   तनूष्मा

ऋ/ ॠ  +  ऋ/ ॠ   =  ॠ  के उदाहरण

यदि सन्धिकार्य में पूर्ववर्ण ऋ अथवा ॠ हो और उत्तरवर्ण भी ऋ अथवा ॠ हो, तो दोनों के स्थान पर ॠ यह आदेश प्राप्त हो जाता है।

  •     होतृ + ऋकार:  =    होतृृृकार:
  •      पितृ + ऋणम्   =     पितृृृणम्
  •      मातृ + ऋणम्   =     मातृृणम्
  •      कर्तृ  + ऋणम्  =     कर्तृृणम्
  •      होतृ + ऋषि:    =       होतृृषि:
  •      भर्तृ + ऋद्धि:    =      भर्तृृद्धि:
  •      धातृ + ऋकार:  =   धातृृकार:

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credit:Shailesh Ghodke

आर्टिकल में अपने पढ़ा कि Savarna Deergha Sandhi किसे कहते हैं, हमे उम्मीद है कि ऊपर दी गयी जानकारी आपको आवश्य पसंद आई होगी। इसी तरह की जानकारी अपने दोस्तों के साथ ज़रूर शेयर करे ।

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